Friday, December 4, 2009

मुझको रोने दो...


आँखों से नहीं, अश्क की दूरी, मुझको रोने दो,

फिर ये कहानी, सुनना पूरी, मुझको रोने दो.

अब जीने का, दिल नहीं करता, मेरा दुनियां में,
जीना भी है, एक मजबूरी, मुझको रोने दो.


ग़र सदमे से, अश्क न निकले, जां ये निकलेगी,
मेरा रोना, बहुत जरुरी, मुझको रोने दो.

जब अश्कों मैं जीना सीखा, मरना सीखा है,
रोकर ही है, ज़िन्दगी पूरी, मुझको रोने दो.



******************

0 comments:

Post a Comment

Search This Blog

Loading...