एक हसीना

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ना पूछो मेरे यारो, क्यों मेरा दिल टूटा है...
एक हसीना ने लूटा है.




खाई थी कसम ना मुकरेंगे, हम अपने पक्के वादों से,
कुछ करले जहां ना बदलेंगे, अपने मजबूत इरादों से,
खाई थी कसम, इस बात से. धरती, सूरज, दिन रात से,
लो प्यार के हर जज्बात से, वो मुकर गया हर बात से,




ना करना यकीं तुमे वादों का, हर वादा इनका झूठा है...
एक हसीना ने लूटा है.




देखो तो सनम के चेहरे को, बिखरी है उसकी लट काली,
इन गोरे-गोरे गलों पे, छाई है गुस्से की लाली,
उन्हें प्यार पे गुस्सा आता है, हमें गुस्से पे प्यार आता है,
दिल यार को पास बुलाता है, और उसको बहुत मनाता है,


क्या कहना हसीं मेरे यार का, ख़ता करके जो रूठा है...
एक हसीना ने लूटा है.




एक वख्त था सारी दुनियां ये, लगती थी हमको बहुत हसीं,
कह राह से गुज़र जाने का, हमको था खुद पर पूरा यकीं,
फिर आया एक दिन वो ऐसा, कुछ रहा नहीं पहले जैसा,
सुख चैन मेरा गया पैसा, ये मैंने रोग लिया कैसा,




जबसे हुआ है प्यार मुझे, खुशियों से साथ मेरा छूटा है...
एक हसीना ने लूटा है.




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