मौसम ये हसीं है, और तू भी यहीं है.
जन्नत है ग़र जहाँ मैं, तो जन्नत वो यहीं है.
दिल आज चाहता है कि चमन से ये कह दूं,
धरती से, चाँद सूरज, गगन से ये कह दूं,
बेहतर कोई गुल उनसे, तुझमें नहीं है.
जन्नत...
मुस्सविर तेरा ही तुझको, न पहचान पायेगा,
कैसे तुझे बनाया, ये ना जान पायेगा,
होगा ख़ुदा परेशां, मुझको यकीं है.
जन्नत...
हमनें तो नहीं देखा, शिकन उनसा जहाँ मैं,
धरती पे, नहीं देखा, नहीं आसमान मैं,
हमको है शक के उनका, जवाब कहीं है.
जन्नत...
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