Friday, December 4, 2009

ग़ज़ल





भीगा गुलाब कहूं तुझको, या खिला कमल कह दूं.
कहूंगा कुछ जरूर, कहो तो ग़ज़ल कह दूं.,


सोच लिया है तुमसे इज़हारे, मुहब्बत की जाय,
अब मसला ये है के, आज कहूं या कल कह दूं.


मरमरी जिस्म ये तेरा, किसी की याद दिलाये,
फ़र्क नहीं ग़र में इसको, ताजमहल कह दूं.

उनसे आशिकी की ख्वाहिश, इंतजार की घडियां,
तनहा मेरी जिंदगी का दौरे, मुसलसल कह दूं.


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1 comments:

  1. पढ़ने के बाद का मसला ये है कि बढ़िया कहूं या बहुत बढ़िया कह दूं... :)

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