आँखें...


देखा जो हमको आपने, झुका ली आँखें.
हाय ये झील सी गहरी, बड़ी प्यारी आँखें.


साए की तरह हर दम, पीछा किया करती हैं,

सवाल भी हम से पुछा किया करती हैं,
और करती हैं लाजवाब, तुम्हारी आँखें.
हाय ये...


एक नज़र में ही मुझे, पागल बना देती हैं,
दिल मैं चुभती हैं मुझे, घायल बना देती हैं,
ये जो हैं आपकी तीखी, कटारी आँखें.
हाय ये...


सुना था मैंने कभी, आँखे पिला सकती हैं,
मय तो आँखों की, मुर्दे जिला सकती हैं,
धीरे-धीरे से चढ़े मीठी, खुमारी आँखें.
हाय ये...



****************************

No comments:

Search This Blog

Powered by Blogger.