Friday, December 4, 2009
सज़ा
ये ना तुम सोचना, सज़ा दी है,
जख्मी दिल ने मेरे, रज़ा दी है.
राज़ दिल के, सब खुद कहे,
यूं तो देखा, तुम चुप रहे,
बात आँखों ने सब, बता दी है,
ये ना...
अपने दिल की, फ़रमाइश की,
मेरे मरने की जो ख्वाहिश की,
सबसे प्यारी मुझे, दुआ दी है,
ये ना...
आज तूने, एक ख़ता की,
करके तारीफ़, बेवफ़ा की,
जलते दिल को, हवा दी है,
ये ना...
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