कुछ मेरे दिल में हुआ, आंखों में चमक आयी,
जो तुमको देखा,
गीतों को मेरे बोल मिले, दिल ने धुन बनाई,
जो तुमको देखा.
कसम खाई है मैंने, न कुछ भी सोचने की,
कसम आंखों ने ली है, न कुछ देखने की,
यूं भी अब तो कुछ, देता नहीं दिखाई,
जो तुमको देखा.
बीत गए हैं वो दिन, में जब रहता था तनहा,
ग़मों से मेरा नाता, न अब कोई भी रहा,
ग़म बन गए हैं ख़ुशी, ख़ुशी में बहार आयी,
जो तुमको देखा.
बीच समुन्दर थी कश्ती, न कोई साहिल पता,
बड़े लम्बे थे सब रस्ते, न कोई मंजिल पता,
फ़िर जाने क्या हुआ, खुद मंजिल चलकर आयी,
जो तुमको देखा.
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