सावन की पहली रात




लो इस बरस के सावन की पहली रात आ गई.
बहुत भूलना चाहा, तुम्हारी याद आ गई.



वो जब पपीहे ने छेडी, तान मीठी डाल पर,
वो जब उमंग ने झांका, दिल से घूंघट निकाल कर,
किया सभी ने ये इशारा, के बरसात आ गयी.
लो इस...


चले भी आओ के सावन में बेरुख़ी कैसी,
हम जैसे दिल के मारों से, दिल्लगी कैसी,
सिवा तुम्हारे दिल के हर ख़ुशी, मेरे हाथ आ गयी,
लो इस...



क्यों इस बहार में करवाते हो, इंतज़ार अपना,
ख़ुशी से दे सको तो दो, मुझको प्यार अपना,
लो नाम प्यार का सुन कर यहां, हयात आ गयी,
लो इस...



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